आजादी के बाद से अब तक भारत में कुल 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं। हर 10 साल में आने वाले इन आयोगों ने न केवल वेतन बढ़ाया, बल्कि भत्तों और सुविधाओं के ढांचे को भी आधुनिक बनाया।
वेतन आयोगों का ऐतिहासिक तुलनात्मक चार्ट
नीचे दी गई तालिका से समझिए कि पहले वेतन आयोग से अब तक न्यूनतम और अधिकतम वेतन में कितनी वृद्धि हुई है:
| वेतन आयोग | लागू होने का समय | न्यूनतम वेतन (₹) | अधिकतम वेतन (₹) |
|---|---|---|---|
| पहला | मई 1946 | 55 | 2,000 |
| दूसरा | 1959 | 80 | 3,000 |
| तीसरा | 1973 | 196 | 3,500 |
| चौथा | 1986 | 750 | 8,000 |
| पांचवा | 1996 | 2,550 | 26,000 |
| छठा | 2006 | 7,000 | 80,000 |
| सातवां | 2016 |
कैसे बदलता गया सैलरी का ढांचा?
- शुरुआती दौर (1st – 2nd): वेतन ढांचा बहुत ही सरल था, जिसमें बेसिक पे के साथ कुछ गिने-चुने भत्ते मिलते थे।
- महंगाई भत्ते का उदय (3rd – 4th): बढ़ती महंगाई को देखते हुए महंगाई भत्ते (DA) को प्राथमिकता दी गई ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे।
- पे-बैंड और ग्रेड-पे (6th): छठे वेतन आयोग ने ‘पे-बैंड’ और ‘ग्रेड-पे’ का सिस्टम लाकर सैलरी कैलकुलेशन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया।
- पे-मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर (7th): सातवें आयोग ने सिस्टम को और आसान करने के लिए ‘पे-मैट्रिक्स’ लागू किया, जिससे प्रमोशन और इंक्रीमेंट समझना आसान हो गया।
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?
चूंकि 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल 2026 में समाप्त होने जा रहा है, इसलिए 8वें वेतन आयोग के गठन की मांग तेज है। उम्मीद की जा रही है कि:
- फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होगी, जिससे बेसिक सैलरी सीधे तौर पर बढ़ेगी।
- न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर काफी आगे जा सकता है।
- पेंशनभोगियों और मौजूदा कर्मचारियों को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है।
