चेक बाउंस होना अब केवल एक बैंकिंग विफलता नहीं, बल्कि एक गंभीर वित्तीय अपराध माना जा रहा है। RBI और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं।
Cheque Bounce New Rules 2026
1. 2026 में मुख्य दंडात्मक प्रावधान
अगर आपका चेक पर्याप्त बैलेंस न होने या किसी अन्य तकनीकी कारण से बाउंस होता है, तो निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:
- भारी जुर्माना: चेक की राशि का दोगुना (Double) तक आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
- जेल की सजा: गंभीर मामलों में 2 साल तक की कैद का प्रावधान है।
- अंतरिम मुआवजा (Interim Compensation): कोर्ट केस चलने के दौरान ही पीड़ित को चेक राशि का 20% भुगतान करने का आदेश दे सकता है।
- खाता फ्रीज: अगर किसी का चेक बार-बार बाउंस होता है, तो बैंक उसका खाता अस्थायी रूप से फ्रीज कर सकता है और नई चेकबुक जारी करना बंद कर सकता है।
2. चेक बाउंस होने के प्रमुख कारण
- अपर्याप्त फंड (Insufficient Funds): खाते में चेक राशि से कम बैलेंस होना।
- हस्ताक्षर में अंतर: बैंक रिकॉर्ड और चेक पर किए गए हस्ताक्षर का मेल न खाना।
- तारीख की गलती: गलत तारीख या पोस्ट-डेटेड चेक की अवधि का ध्यान न रखना।
- लेखन में त्रुटि: शब्दों और अंकों में लिखी गई राशि का अलग-अलग होना।
- क्षतिग्रस्त चेक: चेक का फटा होना या उस पर अधिक ओवरराइटिंग होना।
3. कानूनी प्रक्रिया (Section 138 NI Act)
यदि आपको दिया गया कोई चेक बाउंस होता है, तो आप यह प्रक्रिया अपना सकते हैं:
- बैंक से Return Memo प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर देनदार को लीगल नोटिस (Demand Notice) भेजें।
- नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर यदि भुगतान नहीं मिलता, तो अगले 30 दिनों में कोर्ट में शिकायत दर्ज करें।
- अब डिजिटल साक्ष्यों और ऑनलाइन सुनवाई के कारण इन मामलों का निपटारा पहले से कहीं अधिक तेज हो गया है।
4. चेक बाउंस से बचने के सरल उपाय
- चेक जारी करने से पहले हमेशा अपना बैंक बैलेंस चेक करें।
- डिजिटल भुगतान विकल्पों जैसे UPI, NEFT या RTGS को प्राथमिकता दें, जो अधिक सुरक्षित हैं।
- चेक पर सभी जानकारी (नाम, राशि, तारीख) स्पष्ट रूप से भरें।
- अपने मोबाइल पर बैंक अलर्ट चालू रखें ताकि खाते की गतिविधियों का पता रहे।
