8वें वेतन आयोग के गठन के बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों के अलग-अलग संगठनों और फेडरेशन्स के साथ आयोग की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन ने वेतन आयोग को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग यह है कि महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी (Basic Salary) में मर्ज (मिला) कर दिया जाए।
आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगें क्या हैं और इसके पीछे उनका क्या तर्क है।
1. बेसिक सैलरी में DA मर्ज करने की मांग क्यों?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर रही है, जिससे कर्मचारियों के रहन-सहन का खर्च (Cost of Living) काफी बढ़ गया है।
- फेडरेशन का तर्क: 31 दिसंबर 2025 तक महंगाई भत्ता (DA) लगभग 58% से 60% के स्तर पर पहुंच चुका है। जब DA इतना ऊंचा हो जाए, तो इसे सैलरी का अलग हिस्सा रखने के बजाय बेसिक सैलरी में ही मिला देना चाहिए।
- बड़ा फायदा: चूंकि मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (Travel Allowance), पेंशन और वार्षिक इंक्रीमेंट जैसे कई भत्ते बेसिक सैलरी पर ही कैलकुलेट होते हैं, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ते ही कर्मचारियों का पूरा सैलरी स्ट्रक्चर और इन-हैंड सैलरी काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।
2. ‘फैमिली यूनिट’ मॉडल में बदलाव का प्रस्ताव (3 से बढ़कर 5 यूनिट)
अभी तक (7वें वेतन आयोग के तहत) न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय की गई थी, जो तीन-सदस्यीय फैमिली यूनिट (पति, पत्नी और एक बच्चा) के पुराने मॉडल पर आधारित थी।
- नया प्रस्ताव: फेडरेशन ने मांग की है कि बदलते समय और सामाजिक जरूरतों को देखते हुए फैमिली यूनिट स्ट्रक्चर को संशोधित करके 5 इकाइयों (Units) का किया जाए और उसी आधार पर न्यूनतम वेतन तय हो।
3. समझिए न्यूनतम वेतन बढ़ाने का पूरा फॉर्मूला
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन की गणना के लिए आयोग के सामने एक नया कैलकुलेशन रखा है:
| स्टेप | कैलकुलेशन का तरीका | अनुमानित राशि |
|---|---|---|
| स्टेप 1 | ₹6,000 प्रति यूनिट × 5 फैमिली यूनिट | ₹30,000 |
| स्टेप 2 | संशोधित राशि में मौजूदा 60% DA जोड़ना | ₹30,000 का 60% = ₹18,000 |
| स्टेप 3 | कुल प्रस्तावित न्यूनतम बेसिक वेतन (स्टेप 1 + स्टेप 2) |
अंतिम मांग: फेडरेशन ने तर्क दिया है कि बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और उपभोग खर्चों को ध्यान में रखते हुए 8वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम सैलरी ₹55,000 से ₹60,000 के बीच निर्धारित की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा?
कर्मचारी संगठनों की इन मांगों पर अब 8वें वेतन आयोग का पैनल विचार करेगा। यदि सरकार और आयोग इन सिफारिशों को स्वीकार कर लेते हैं, तो यह केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक होगी।
