केंद्र सरकार के 50 लाख से अधिक कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों के लिए आठवां वेतन आयोग इस समय सबसे बड़ा चर्चा का विषय है। मूल वेतन, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो रही है। आइए जानते हैं आठवें वेतन आयोग से जुड़े 5 प्रमुख अपडेट्स:
1. 18 महीने की समयसीमा और मौजूदा स्थिति
- प्रक्रिया की प्रगति: सरकार द्वारा दी गई 18 महीने की समयसीमा में से 9 महीने पूरे हो चुके हैं।
- पहला चरण पूरा: आयोग ने प्राथमिक डेटा कलेक्शन, आंतरिक ढांचा तैयार करने और कर्मचारी संगठनों (JCM NC) से शुरुआती ज्ञापनों को प्रोसेस करने का काम पूरा कर लिया है।
- परामर्श जारी: वर्तमान में आयोग विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहा है, ताकि तय समय पर सिफारिशें सरकार को सौंपी जा सकें।
2. 1 जनवरी 2026 से लागू होगा नया वेतन और मिलेगा एरियर (Arrears)
- प्रभावी तिथि: नए वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी।
- बकाया राशि: यदि सिफारिशों को लागू करने या अंतिम रिपोर्ट सौंपने में समय लगता है, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2026 से बकाया एरियर (Arrears) का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।
3. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) पर बड़ा अपडेट
- मांग और अनुमान: 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। इस बार कर्मचारी यूनियनों ने इसे बढ़ाकर 2.86 से 3.68 करने की मांग की है।
- संभावित दर: वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग इसे 2.25 से 2.57 के बीच रखने की सिफारिश कर सकता है।
4. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर कितनी होगी?
- मूल वेतन में उछाल: यदि नया फिटमेंट फैक्टर 2.25 से 2.57 के बीच तय होता है, तो पे-मैट्रिक्स (लेवल-1) में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
- बेसिक सैलरी: वर्तमान में न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 प्रतिमाह है, जो बढ़कर ₹40,000 से ₹46,000 प्रतिमाह के दायरे में पहुंच सकता है।
- न्यूनतम पेंशन: इसी अनुपात में निवृत्त कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन (जो फिलहाल ₹9,000 है) बढ़कर ₹20,000 से ₹23,000 के करीब हो सकती है।
5. देशभर के हितधारकों के साथ बैठकों का दौर जारी
- व्यापक परामर्श: आयोग सेना, रेलवे, डाक, सिविल सेवाओं और पेंशनर्स एसोसिएशन से प्राप्त सुझावों का विश्लेषण कर रहा है।
- जमीनी आकलन: नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में परामर्श प्रक्रिया पूरी करने के बाद कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ सीधी बैठकें की जा रही हैं, ताकि महंगाई दर और जीवन-यापन की लागत का सही आकलन किया जा सके।